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  • राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित गीतकार ब्रजकिशोर दुबे के ह?: रक्षा-बंधन पर हर साल एगो गीत पूर्वाञ्चल में गूँजेला – ‘राखी हर साल कहेले सवनवा में, भइया बहिनी के हरदम रखिहs मनवा में / बहिनी बसेलू तू हमरा परनवा में, तोहरी मनसा पुराइब हर जनमवा में’. राखी पर एह से बढ़िया गीत का हो सकत बा? ई हृदयस्पर्शी गीत ब्रजकिशोर दूबे जी के लिखल ह. एह गीत में ई ताकत बा कि कवनो कारण से भाई-बहिन में रूसा-फूली भइल होखे भा बोलचाल बंद होखे त गीत मन के मइल आँख के लोर से धोके रिश्ता के टूटल तार फेर से जोड़ सकेला. चित्रगुप्त जी के संगीत पर, अलका याज्ञनिक आ मनहर उदास के आवाज में, दूबे जी के संवेदना से भरल बोल आ भाव जादू करत बा. शत्रुघ्न सिन्हा आ शकीला मजीद पर फिल्मावल फिल्म ‘बिहारी बाबू’ के ई गीत एगो अमर गीत बा. के ह ब्रजकिशोर दुबे? 24 जनवरी 1954 के मंगरवलिया, रोहतास, बिहार में जनमल दुबे से उनका यात्रा पर न जाने केतना बेर हमरा बातचीत भइल बा. बकौल दूबे जी, “ आकाशवाणी, पटना के ‘चौपाल ‘ के मुखिया जी ‘ (स्व. गौरी कांत चौधरी ) के पुत्र आ हमार मित्र सुप्रसिद्ध पत्रकार लक्ष्मी कांत ‘सजल ‘ जी हमरा के 1984 में एक दिन राम बाबू से मिलववले जे ‘माई ‘ फिल्म बनावे के तइयारी में रहन. बातचीत में उ हमरा के ‘माई ‘ के गीत लिखे के कहलन आ हम गीत लिखे में लाग गइलीं. एही बीचे ‘गंगा किनारे मोरा गाँव ‘ के निर्देशक दिलीप बोस जी पटना आइल रहीं जेकरा के राम बाबू ‘माई ‘ के निर्देशक रखेवाला रहन. ऊ हमरा के उहाँ से मिलववले आ उहाँ का हमरा से दू-तीन गो गीत सुनलीं. संजोग से ओही घरी शत्रुध्न सिन्हा जी के ‘बिहारी बाबू’ बने लागल आ एकर निर्देशक दिलीप बोस जी रहीं जे लोकेशन देखे खातिर फेर पटना गइल रहीं. उहाँ का रामबाबू के खबर कइलीं कि ऊ हमरा के उहाँ से जतना जल्दी हो सके मिलवावस काहे कि हमरे ओकर गीत लिखे के रहे. 11 जनवरी 1985 के राम बाबू संगे सांझि खानि हम उहाँ से शत्रुध्न सिन्हा जी के घरे मिललीं आ उहाँ का हमरा के 12 जनवरी 1985 के गाड़ी धरे के कहलीं. 14 जनवरी 1985 के हम बंबई पहुंच गइलीं. दिलीप बोस जी जहाँ लेखन में लागल रहीं. हमरा के पहिला गीत (राखी के गीत ) लिखे के मिलल. 16 जनवरी 1985 के चित्रगुप्त जी से भेंट भइल आ गीत के कुछ कड़ी सुनवला के बाद हमरा के गीतकार राख लिहल गइल. ‘बिहारी बाबू ‘ के सब गीत लिखत-लिखत चित्रगुप्त जी अतना प्रभावित भइलीं कि पुत्रवत नेह दुलार देवे लगलीं. उहाँ का हमरा के बंबई में रहे के सलाह देलीं, बाकिर अपना पारिवारिक हालत के चलते हम स्थाई रूप से बंबई में रहे के हालत में ना रहीं. उहाँ के भावुक होके कहलीं “हमार आसिरवाद बा. बंबई में नाहियों रहला प रउआ के लोग गीत लिखे खातिर बोलावत रही, जवन हरदम साँच भइल. आगे ब्रज किशोर जी कहनी कि ‘बिहारी बाबू ‘ के बाद रामबाबू के ‘माई ‘ बने लागल जवना के निर्देशक रहलीं ‘ दूलहा गंगा पार के’ निर्देशक राज कुमार शर्मा जी. गीत त हम पहिलहीं लिख के रखले रहीं. फेर दृश्य के मुताबिक ओकरा के बनावल गइल. एकर संगीत संयोजन उत्तम सिंह जी कइलीं. गीत से राजकुमार शर्मा जी अतना प्रभावित भइलीं कि हमरा के छोट भाई अइसन माने लगलीं. भगवान के अइसन किरिपा भइल कि ‘ माई ‘ के जुबली हो गइल. ‘बिहारी बाबू ‘ आ ‘माई ‘ के गीतकार के रूप में हमरा जनता के अपार नेह-दुलार मिलल आ हमार पहचान बन गइल. एही तरे गीत-लेखन के यात्रा चलत रहल जवन आजो चल रहल बा. ब्रजकिशोर दूबेजी के गीत वाला कुछ प्रमुख फिल्म बा, बिहारी बाबू, माई, जुग जुग जीयs मोरे लाल, हो जाये द नयना चार, महुआ, हे तुलसी मइया, दुलहिन, हम हईं गँवार आ हमार देवदास आदि. ‘राखी हर साल कहेले सवनवा में, भईया बहिनी के रखिहs अपना मनवा में‘ के अलावा जवना गीतन से दूबे जी के पहचान मिलल, ओह मे के कुछ प्रमुख गीत बा – तोहरी सुरतिया से (‘बिहारी बाबू), सरवता कहाँ भूलि गइलs (‘बिहारी बाबू), माई ना रही त (माई), जीयs बबुआ जीयs(‘जुग जुग जीयs मोरे लाल), बेटी भइली पराई (‘हे तुलसी मइया) आ अइले कन्हइया तोहार (‘हो जाय त नयना चार) आदि. https://hindi.news18.com/news/entertainment/bhojpuri-president-award-winning-lyricist-brajkishore-dubey-life-facts-bhojpuri-manoj-bhawok-4902737.html

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