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  • अहिल्याबाई होलकर- मंदिर वाली महारानी क काशी से रहल खास नाता: काशी से ओनकर खास नाता मंदिर के नाते ही रहल. बाबा विश्वनाथ क मौजूदा मंदिर अहिल्याबाई क ही बनवावल हौ. अगर अहिल्याबाई इ काम न कइले होतिन त आज बाबा काशी में कवने रूप में होतन, कुछ कहल नाहीं जाइ सकत. अहिल्याबाई में ईश्वर भक्ति क भाव लड़िकइयां से ही देखाए लगल रहल. उ गांव के मंदिर में अकसर गरीबन के सेवा के काम में जुटल रहयं. आठ साल के उमर में एक दइया जब उ मंदिर में सेवा क काम करत रहलिन, मालवा क सुबेदार मल्हार राव होलकर क नजर ओनकरे उप्पर पड़ल. मल्हार राव पुणे जात समय चौड़ी गांव में विश्राम करय बदे रुकल रहलन. अहिल्याबाई क जनम महाराष्ट्र के एही चौंड़ी गांव (अहमदनगर) में 31 मई, 1725 के भयल रहल. मल्हार राव अहिल्याबाई से एतना प्रभावित भइलन कि माकोंजी शिंदे से बिटिया क हाथ अपने बेटवा खांडे राव होलकर बदे मांगि लेहलन. मल्हार राव अहिल्याबाई के लेइ के इंदौर आइ गइलन. एह तरे से आठ साल के उमर में ही सन् 1733 में खांडे राव से अहिल्याबाई क बियाह होइ गयल. सन् 1745 में एक लड़िका माले राव अउर 1748 में एक बिटिया मुक्ताबाई क जनम भयल. दुर्भाग्य कि कुंभेर के लड़ाई में 1754 में खांडे राव क निधन होइ गयल, अहिल्याबाई कमय उमर में विधवा होइ गइलिन. पति के मरले के बाद अहिल्याबाई संन्यासिन बनय चहलिन, लेकिन ससुर ओनसे राजकाज संभारय क आग्रह कइलन. अहिल्याबाई क दुर्भाग्य एकरे बाद भी पीछा नाहीं छोड़लस. सन् 1766 में ससुर अउर 1767 में बेटवा मालेराव क भी निधन होइ गयल. अकेली अहिल्याबाई फिर भी हिम्मत नाहीं हरलिन, बल्कि हर मुसीबत के हराइ के आगे निकलत गइलिन. Read-more :https://hindi.news18.com/news/bhojpuri-news/ahilyabai-holkar-jayanti-2022-know-her-relation-with-kashi-bhojpuri-saroj-kumar-4291987.html

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