About Us
परनाम!स्वागत बा राउर रियल भोजपुरी डॉट कॉम प। टीम रियल भोजपुरी आपन भोजपुरी प...
Real Bhojpuri Poll
 
भारत से बाहर भोजपुरी कहाँ बोलल जाला
सिंगापुर
मारीशस
फिजी
सब जगह
    

Articles

  • दिव्य आयोजन होला बुढ़वा मंगल के: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी अपना एगो निबन्ध ‘वसन्त के अन्य उत्सव’ में लिखले बानी- मनुष्य ही प्रधान है, प्रकृति का उत्सव उसकी अपेक्षा में होता है. किन्तु अगर मनुष्य ही जड़ीभूत बना रहा तो उत्सव कहाँ हुआ? पर द्विवेदी जी के ई शिकायत कभी काशी के लोगन से ना रहल. वजह काशीवासी प्रकृति के हर मौसम के अकवारी में भरी के स्वागत करके खातिर अवसर के ताक में रहेला. एह से रंगभरी एकादशी से लेकर महाश्मशान के होली खेलले के बाद होली के विदाई अउर नवसंवत्सर के आगमन के तैयारी के भी ओतने जोश खरोश के साथ स्वागत करेके तैयारी में जुट जाला. कहल भी गईल बा- काशी के अद्भुत व्यवहार/ सात वार नौ त्योहार. पौराणिक मान्यता ई बा कि नववर्ष के आगमन के पूर्व अउर नववर्ष के सफलता खातिर अपना बड़-बुजुर्गन के आशीर्वाद के कामना से होली के पहिला मंगलवार के ‘बुढ़वा मंगल’ के आयोजन के परंपरा चलल आवत बा. मोतीचंद्र जी के ‘काशी के इतिहास’ पुस्तक में भी बतावल बा कि सन् 1735 काशी नरेश के सिपहसालार मीर रुस्तम अली ‘बुढ़वा मंगल’ के आयोजन करवले रहलन. बनारस गजेटियर के मुताबिक नवाब असिफजुदौला के पुत्र वजीर अली ‘बुढ़वा मंगल’ के शुरुआत कइलन. आउर पढ़ीं :https://www.prayagrajexpress.co.in/2022/03/22/read-in-bhojpuri-the-wonderful-behavior-of-kashi-seven-times-nine-festival-of-divine-event-hola-old-age-mangal/

    1 views

Website Security Test