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  • भोजपुरी विशेष, जगन्नाथ- सांस खातिर सरगम बेगाना भइल: कविवर जगन्नाथ भोजपुरी ग़ज़ल के सबसे प्रभावशाली हस्ताक्षर हैं। उनकी ग़ज़लों प्रेम से इतर उस यथार्थ का उद्घाटन है जो रोज़-ब-रोज़ की हमारी जिंदगी में शामिल है और हम उसे समझ नहीं पाते। उन्होंने अपने परिवेश की, हर अच्छाई-बुराई की, राग-द्वेष की, सौहार्द-सद्भाव की, छल-कपट की, सदाचरण और दुराचरण सबकी पड़ताल की है। उनकी गजलों में प्रतीकों और मुहावरों के सटीक प्रयोग के साथ नए अर्थो में प्रचलित शब्दों का प्रयोग भी देखने को मिलता है। फारसी की परम्परागत बहरों के साथ-साथ भोजपुरी परिवेश में अभिव्यक्ति उनकी प्रयोगधर्मिता की बानगी है- सांस खातिर सरगम बेगाना भइल जिंदगी बस जिये के बहाना भइल सांसों के लिए अब सरगम बेगानी हो गई है, जिंदगी भी बस जीने के लिए बहाना हो गई है। गिर के उनका नज़र से उठल बानी हम गिर के उनका नज़र से उठल बानी हम बानी सबका नज़र के निशाना भइल उनकी नजरों से गिर कर हम उठे हैं, इसलिए हम सबकी नजरों के निशाने पर हैं। लोर पिए के जनमे से लागल लकम अब ना छुटी निसा ई पुराना भइल जन्म से ही हमें आँसू पीने की आदत है, अब नशा कैसे छूटेगा जो बहुत पुराना हुआ। उनका रोवला बुला एगो मुद्दत भइल उनका रोवला बुला एगो मुद्दत भइल हमरा हँसला, ए यारे ! ज़माना भइल उनको रोये हुए मुद्दतें हुई, हमें भी हँसे हुए ज़माना हो गया। रउवा दिहीं दरद ना, ग़ज़ल देब हम इ ग़ज़ल रउवा नाँवें बयाना भइल… https://www.amarujala.com/kavya/kavya-charcha/best-bhojpuri-poem-of-jagannath?page=3l

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