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  • Bhojpuri: अन्नपूर्णा माई क काशी से ही काहें हौ खास रिश्ता, पढ़ीं पूरी कथा: अब बाबा के दर्शन के साथे भक्त लोग माई क भी दर्शन कइ पइहय. माई अन्नपूर्णा अन्न क देबी हइन अउर ओनही के नाते सबकर पेट भरयला. ओनकरे आशीर्वाद से काशी में केव भूखा नाहीं रहत. अन्नपूर्णा माई क मंदिर देश में कई जगह बा, लेकिन माई क असली वास काशी ही हौ. एकरे पीछे पुराण में कथा हौ.

    अन्नपूर्णा अष्टकम में लिखल हौ कि जब भगवान शिव से माई पार्बती क बियाह भयल, तब उ अपने माई-बाबू रानी मैना अउर राजा हिमाचल क घर छोड़ि के शिव के साथे कैलाश पर्वत आइ गइलिन. कैलाश में शिव क जीवनशैली बहुत कठिन रहल. शिव अउर ओनकर तमाम गण लोग भूखा-नंगा रहय. माई पार्बती के इ अच्छा न लगय. उ अब गृहस्थी जमावय क इंतजाम करय लगलिन. माई पार्बती पहिले रसोई तइयार कइलिन अउर भोजन पकय लगल. कैलाश पर भोजन के सुगंध से भोलेनाथ क गण लोग परेशान होइ गइलन. हल्ला-गुल्ला करय लगलन अउर माई से भोजन पकावय से मना कइलन. सबकर कहना रहल कि उ सब कंदमूल फल खालन. माई फिर भी नाहीं मनलिन. शोरगुल बढ़य लगल त शिव क भी तंद्रा टूटल. उ भी पार्बती के भोजन पकावय से मना कइलन. शिव के मना करब पार्बती के अच्छा नाहीं लगल, अउर उ नराज होइ के कैलाश छोड़ि देहलिन.

    नइहरे से तुरंत आइल रहलिन, उहां जाए क कवनो तुक नाहीं रहल. एह से उ शिव क नगरी काशी आइ गइलिन. पार्बती के कैलाश से हटतय भोजन क सुगंध खतम होइ गइल अउर गण लोगन के भूख लगय लगल. सब चिल्लाए लगलन. बाबा क ध्यान टूटल त ओन्हय भी भूख महसूस होवय लगल. जब रसोई में जाइ के देखलन त कुल बर्तन खाली, अउर पार्बती गायब. शिव बहुत खोजलन, लेकिन पार्बती नाहीं मिललिन. ध्यान लगइलन त पता चलल पार्बती काशी पहुंचि गइल हइन.

    एकरे बाद भगवान शिव काशी जाइ के माई से अपने गणन क पेट भरय बदे भीख मंगलन. माई के भी दया आइ गइल अउर उ आपन पूरा अन्न धन क खजाना खोलि देहलिन. शिव के बइठाइ के भोजन करउलिन, अउर वादा कइलिन कि आज के बाद से तोहार गण लोग कभौ भूखा न रहिअय. माई के काशी एतना पसंद आयल कि उ काशी में ही रहि गइलिन. माई के एही आशीर्वाद के नाते काशी में रहयवाला कवनो आदमी भूखा नाहीं रहत. एही बदे कहावत हौ -चना चबैना गंग जल, जो पुरवय करतार, काशी कभौ न छोड़िए बाबा विश्वनाथ दरबार.

    एक बार महर्षि वेदव्यास काशी आयल रहलन. उ इहां भगवान शिव क अपमान कइ देहलन. एकरे नाते काशी में केव भी ओन्हय भिक्षा नाहीं देहलस. कई दिना क भूखायल वेदव्यास अउर ओनकर चेला लोग जब तड़पय लगलन तब अन्नपूर्णा माई ही ओन्हय अउर ओनकरे 10 हजार चेलन के खाना खियाइ के सबकर जान बचइलिन. पुराण में एकर एक ठे कथा हौ. वेदव्यास अपने चेलन के साथे तीरथ पर निकलल रहलन. नैमिशारण्य पहुंचलन त उहां ऋषि-मुनि, पंडित लोग ओनकर स्वागत सत्कार कइलन, फिर सत्संग होवय लगल. उहां मौजूद लोग भगवान शिव के परमेश्वर बतावय लगलन. वेदव्यास एकर विरोध कइलन अउर कहलन कि सबसे श्रेष्ठ श्रीहरि महाविष्णु हयन. शिवभक्त लोग वेदव्यास के चुनौती देहलन कि उ विश्वेश्वर के पास जायं, ओन्हय खुद एकर अंदाजा लगि जाई. वेदव्यास के गुस्सा आयल अउर उ तुरंत काशी बदे निकलि पड़लन. काशी पहुंचले के बाद उ विश्वेश्वर धाम बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचलन अउर तेज अवाज में हाथ उठाइ के बोलय लगलन कि सारे लोक क एकमात्र आराध्य भगवान विष्णु हयन. इहय सत्य हौ. महर्षि क चेला लोग भी ओनकर साथ देहलन.

    महर्षि क इ कथन सुनि के दुआरी पर बइठल नंदीश्वर के गुस्सा आइ गयल अउर उ ओन्हय शाप देइ देहलन. वेदव्यास क हाथ अउर मुंह जहां क तहां फिक्स होइ गयल. भगवान विष्णु कुल तमाशा देखत रहलन. उ व्यास से कहलन कि तू वाकई में बहुत बड़ा अपराध कइला. भगवान शिव ही सर्वेश्वर हयन. ओनही के कृपा से त हम लक्ष्मीपति, चक्रधारी अउर पता नाहीं का का बनि के बइठल हई. तू वापस महेश्वर से प्रार्थना करा, ओनसे क्षमा मांगा. लेकिन जब वेदव्यास शिव क स्तुति करय चहलन त अवाजय नाहीं निकलल. फिर भगवान विष्णु अपने हाथे से ओनकर कंठ छुअलन. अवाज त निकलय लगल, लेकिन हाथ जस क तस. वेदव्यास अब शिव क स्तुति करय लगलन. क्षमा याचना कइलन. तब जाइ के उ सामान्य अवस्था में भइलन. वेदव्यास तत्काल एक शिवलिंग स्थापित कइलन अउर पूजा-अर्चना कइलन. इ शिवलिंग बाद में व्यासेश्वर के नावे से परसिद्ध भयल. अब व्यास भगवान शिव क भजन-कीर्तन करत काशी में वास करय लगलन. लेकिन काशी क लोग अबही भी ओनसे नराज रहलन. चेला लोग भीख मांगय जायं त केव भीखय न देय. चेला लोग खाली हाथ लउटि आवयं. कई दिन बीति गयल, सब भूख से तड़पय लगलन.

    वेदव्यास चकित रहलन कि जहां विश्वेश्वर, अन्नपूर्णा अउर गंगा क वास होवय, उहां आदमी भूखा कइसे रहि सकयला? अपने चेलन के तड़पत देखि के वेदव्यास से नाहीं रहि गयल अउर उ गुस्सा में काशी नगरी के शाप देइ देहलन कि तीन पीढ़ी तक इ नगर विद्या, संपत्ति अउर मुक्ति से दूर होइ जाई. वेदव्यास के शाप के बाद विशालाक्षी मंदिर के सामने एक औरत प्रकट भइल. उ वेदव्यास के पास जाइ के कहलस कि महराज आज हमय एक भी अतिथि नाहीं मिललन, हमार पतिदेव बिना कवनो अतिथि के भोजन करइले भोजन नाहीं करतन. अगर आप हमार आतिथ्य स्वीकार करय त बड़ी कृपा होई. वेदव्यास कहलन कि हम अकेलय नाहीं हई, हमार 10 हजार चेला भी हउअन. बिना ओन्हय भोजन करइले हम खुद भोजन न करब. अगर सुरुज बिसवय से पहिले कुल चेलन के भोजन कराइ सका त हम तइयार हई. औरत वेदव्यास क प्रस्ताव स्वीकार कइ लेहलस.

    कुछ समय बाद वेदव्यास चेलन के साथे औरत के घरे पहुंचलन. उहां सबलोग भर पेट स्वादिष्ट भोजन कइलन. भोजन के बाद सबके वस्त्र भी उपहार में मिलल. वेदव्यास चकित रहलन कि इ साधारण औरत एतने जल्दी एतना लोगन के भोजन क इंतजाम कइसे कइलस. उ औरत के आशीर्वाद देहलन, अउर चेलन के साथे उहां से जाए लगलन. तबय उ औरत प्रणाम कइ के वेदव्यास से सवाल कइलस -महराज अगर आप हमय इ बतले जायं कि तीर्थयात्रिन क धर्म का होला त आप क बड़ी कृपा रही. वेदव्यास जवाब देहलन -तीर्थयात्रिन क हृदय निर्मल अउर चित्त शांत होवय के चाही, मन में संयम रहय के चाही. औरत दूसर सवाल दगलस -का आप काशी में एह धर्म क पालन कइलन? व्यास निरुत्तर होइ गइलन. ओनकर सिर झुकि गयल. एही समय महिला क पति भी उहां पहुंचि गयल. उ व्यास से कहलस कि तू क्रोध में काशी नगरी के शाप देइ देहला, तीर्थयात्रिन क जवन धर्म खुद बतइला, ओकर भी पालन नाहीं कइला. एह के नाते तोहय काशी में रहय क अधिकार नाहीं हौ. तू इहां से चलि जा. इ दूनों महिला-पुरुष माई अन्नपूर्णा अउर बाबा विश्वनाथ रहलन. वेदव्यास के आत्मज्ञान होइ गयल. उ दूनों आराध्यन के गोड़े पर गिरि पड़लन. क्षमा-याचना बहुत क्षमा-याचना मंगलन. प्रार्थना कइलन कि माई हमय खाली अष्टमी के दिना काशी में आवय क अनुमति देइ देयं. भगवान शिव अउर माई अन्नपूर्णा के वेदव्यास के उप्पर दया आइ गइल. ओन्हय क्षमा कइ देहलन. लेकिन अपराधबोध के नाते वेदव्यास काशी क्षेत्र छोड़ि के गंगा ओह पार चलि गइलन. ओही ठिअन आश्रम बनाइ के रहय लगलन.

    काशी में अन्नपूर्णा माई क मंदिर बाबा विश्वनाथ मंदिर के बगल में हौ. दिवाली के अगले दिना अन्नकूट के माई क विशेष दर्शन होला. एह दिना माई क सोने वाली विशेष मूर्ति क दर्शन होला. एह के नाते सबेरे मंदिर खुलतय भक्तन क भीड़ उमड़ि पड़यला अउर राती के मंदिर बंद होवय तक भीड़ उमड़ल रहयला. अन्नकूट के दिना माई क खजाना भी खुलयला अउर हर दर्शनार्थी के बांटल जाला. मान्यता हौ कि अन्नकूट के दिना जेके माई क खजाना मिलि जाला, ओहके अन्न-धन क कमी नाहीं होत. माई अन्नपूर्णा के शाकुंभरी देवी भी कहल जाला. Source-https://hindi.news18.com/news/bhojpuri-news/maa-annapurnas-special-relation-with-kashi-read-ful-stroy-in-bhojpuri-3852430.html

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