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  • Bhojpuri: दिवाली आ छठ में मन के रिचार्ज करीं: हमरा बुझाला कि पूजा-पाठ, प्रार्थना मन के दिया के जरावे खातिर होला. मन के शोधन खातिर होला. मन के रिचार्ज करे खातिर होला. कठिन से कठिन समय में भी सकारात्मक रहे खातिर होला, संभावना खोजे खातिर होला. प्राण यमराज के हाथ में जाये ओकरा पहिले तक अपना हाथ में ठीक से रहे के चाहीं. ठीक से माने ठीक से. अपना नियंत्रण में. एही खातिर साधना कइल जाला. परमात्मा भा प्रकृति से जुड़ल जाला. अपना इहाँ के सब पूजा-पाठ आ तीज-त्योहार के वैज्ञानिक महत्व बा. ई सब अंततः स्वास्थ्य, शांति, सकून, शक्ति, साहस, समाधान, समृद्धि आ सद्भावना प्रदान करे खातिर बनल बा. ओकरा ऐतिहासिक महत्व के एगो अलग आयाम बा. दशहरा आ नवरात्रि में राम गूँजत रहेलें. रामलीला चलत रहेला. खुद राम के लीला अपना आप में हर समस्या के समाधान समेटले बा. राम जेतना दुख के झेलले बा, राम जेतना परीक्षा से के गुजरल बा? मंच भा टेलीविजन के रामलीला में दुख के ग्लैमराइज कइल गइल बा. लोग के ग्लैमराइज्ड दुख, विषाद भा लड़ाई देखे में मजा आवेला बाकिर जे ओकरा के भोगले बा, जे ओह में तपल बा, ओकरा से पूछीं. शायर साहिर लुधियानवी के एगो गीत के पंक्ति बा- जो तार से निकली है वो धुन सब ने सुनी है जो साज़ पे गुज़री है वो किस दिल को पता है हिन्दी-उर्दू-भोजपुरी के शायर भाई साकेत रंजन प्रवीर के एगो शेर बा – गम सुनावे में दम निकल जाला हं मगर मन तनी बहल जाला गम, दुख, पीड़ा, कष्ट, तनाव जिंदगी के हिस्सा ह. ई सब ऊर्जा के क्षीण करेला. मन के बैटरी के डाउन करेला. हमरा समझ से पूजा-पाठ, योग-अनुष्ठान, ध्यान आदि मन के चार्ज करे खातिर होला ताकि कष्ट, बीमारी, दुख आदि होखबो करे त ओकर एहसास ना होखे भा कम होखे. बाहर में कतनों हलचल होखे, अंदर (मन) शांत होखे. इहे साधना ह. साध लेला पर ई संगीत जइसन लागेला. मनोज भावुक के एगो शेर बा – दुखो में ढूंढ ल ना राह भावुक सुख से जीये के दरद जब राग बन जाला त जिनगी गीत लागेला आ साँच पूछीं त जिनगी गीते ह, बस एकरा के राग आ लय में रखे के पड़ी. समय, परिस्थिति आ कुछ राक्षसी प्रवृति के लोग रउरा के बेलय करे के कोशिश करी बाकिर साधना इहे ह कि बाहरी परिस्थिति के असर अंदर ना पड़े. मुश्किल समय भी संभावना बन जाय. दरअसल हर समस्या में एगो संभावना छुपल रहेला, बस सकारात्मक नजरिया के बात बा. प्रेमे ईलाज बा तनाव के मनुष्य के सबसे बड़ उपलब्धि बा कि ओकरा पास एगो विकसित दिमाग बा लेकिन साथ हीं सबसे बड़ परेशानियो के कारण इहे बा. दिमगवे नू तनाव के घर ह. हाल हीं में भइल सर्वे के अनुसार दुनिया में 86 प्रतिशत लोग तनाव के शिकार बा. अपना देश भारत में त 89 प्रतिशत लोग ‘टेंशन’ में जीयsता. दुनिया में एतना नफरत फइलल कि तरह-तरह के बम आ मिसाइल बनल. प्यार आ मुहब्बत खातिर कुछ बनल कहाँ? प्यार के संदेश देवे वाला भा कोशिश करे वाला के त अक्सर जहर पियावल गइल. कहे के मतलब कि दुनिया में ज्यादा डिस्ट्रक्टिवे लोग बा. दोसरा के परेशान, दुखी भा तनाव में देख के खुश होखे वाला लोग. एही से सिनेमो में अइसन दृश्य खूब देखावल जाला. देश के भीतर जाति-धर्म-संप्रदाय-भाषा आदि के आधार पर जवन ग्रुप, गैंग आ खेमा बनल ओह में वैचारिक मतभेद मनभेद तक पहुंचल आ लोग एक-दुसरा के नीचा देखावे खातिर नीचता के स्तर पर उतरे लागल. राष्ट्र, मानवता आ समाज के हित के फिकिर छोड़ के सामने वाला के मान-मर्दन खातिर हुलेले में लाग गइल. एक-दुसरा के हौसला देवे के बजाय तनाव देवे में लाग गइल आ पूरा देश भा पूरा विश्व तनावग्रस्त हो गइल. सवाल ई बा कि कवनों भी देश भा समाज जब एही सब में लागल रही त उ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आ सृजन पर कइसे फोकस करी? विकास खातिर भा क्रियेशन खातिर एगो सकारात्मक माहौल जरूरी होला, तनावमुक्त मन जरूरी होला. इहाँ त तनाव हर आँगन भा शहरी फ्लैट के हर कमरा तक पहुँच गइल बा. ना यकीन होखे त कचहरी जाके डिवोर्स के केस देखीं. खेत के डंरार खातिर कपारफोरउअल आ मुकदमाबाजी देखीं. त, ना त पति-पत्नी में पटsता, ना सहोदर भाई में. समाज में त कुछ कुक्कुरन के गोल बनले बा जवन खाली निगेटिविटी फइलावे खातिर जनमल बाड़न स. आखिर हर 40 सेकेंड पर एगो आदमी आत्महत्या काहे करsता. ई हम नइखीं कहत, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के रिपोर्ट कहsता. .. आ एह में ज्यादा नौजवाने लोग शामिल बा. केहू के बेवक्त मूअल बहुत खतरनाक होला. ऊ अपना साथे परिवार में केतना लोग के मार देला, जिंदा लाश बना देला. एह से जहां तक संभव होखे, जइसे संभव होखे, अइसन मौत के रोके के कोशिश होखे के चाहीं. मित्र, परिवार अउर इंसानियत से भरल अन्य लोग भी अवसाद, विषाद, तनाव, निराशा आ पीड़ा में आकंठ डूबल लोग के साथे खड़ा होखे. ओकरा के अकेला मत छोड़े. ओकरा के समझा के, बुझा के, गला लगा के, बीच-बचाव क के, पंचायती क के, ओकरा साथे खड़ा होके, आर्थिक, मानसिक भा शारीरिक सहयोग क के ओकरा के बचावे, जिंदगी देवे. इहे मानवता ह. राक्षसन के काम त दोसरा के तकलीफ में अट्टहास कइल ह. पीड़ित आदमी के भी एह सच्चाई के स्वीकार कर लेवे के चाहीं. एहू बात के पक्का यकीन होखे के चाहीं कि जे दोसरा खातिर गड्ढा खोदेला, ईश्वर ओकरा खातिर गड्ढा खोद देलें. ईश्वर के सत्ता पर भरोसा करे के चाहीं. हर युग में एह दुनिया में अच्छा आ बुरा आदमी रहल बा. एह से समस्या त रही. हमेशा रही, अलग-अलग रूप में. ओकर असर रउरा तन आ मन पर कम से कम पड़े, ओकरा खातिर अपना के अंदर से मजबूत करे के पड़ी. साधना करे के पड़ी. फॉर्गेट एंड फॉर्गिव के फार्मूला अपनावहीं के पड़ी. अपना दिमाग के प्यार के कटोरा बनावे के पड़ी. ओह में नफरत टिकी ना. नफरत ना रही त अवसाद, विषाद आ टेंशन ना रही. एकरा खातिर मेडिटेशन, मेडिकेशन, योगा, काउंसिलिंग, पूजा-प्रार्थना जवन जरूरी होखे कइल जाय. जिंदगी तोहफा ह. वरदान ह. एकरा के असमय मौत से बचावल जाय. मौत से बेहतर बा चीखल-चिल्लाइल, गरियावल चाहे जी भर के रोअल. दुख भा तनाव के आउटलेट चाहीं. आँख में लोर के सूखल एगो सैलाब के दावत दिहल ह. हमरा (मनोज भावुक ) कविता ‘’ यादें और चुप्पियां’’ के एगो अंश बा – यादें और चुप्पियाँ एक दुसरे के Directly Proportional होतीं हैं चुप्पियाँ ..यादों के समन्दर में डुबोती चली जाती हैं कहते हैं .. खामोशी और बोलती है …..Echo भी करती है पगला देती है आदमी को ….. इसलिए शब्दों का और आंसुओं का बाहर निकलना बहुत जरुरी है दिमाग से कचड़ा बाहर निकाले के यत्न होखे. विध्वंस कवनो रास्ता ना ह. सम्राट अशोक विध्वंस भी कइलें आ प्रेम भी. ..बाद में प्रेमे के रास्ता अपनवलें. बेटो-बेटी के प्रेमे के राह धरवले. प्रेमे ईलाज बा नफरत के. प्रेमे ईलाज बा तनाव के. दिमाग के प्रेम के कटोरा बना लीं. सब ठीक हो जाई. …बाकी खातिर दुर्गा माई, लक्ष्मी माई आ छठी माई बा लोग नू. बिना आस्था आ करिश्मा के कई युग से एह लोग के पूजा के अविरल धारा थोड़े बहत बा. दुख, निराशा आ परेशानी ज्यादातर मन के ओढ़ल-बिछावल चीज बा. आत्मा के असली प्रकृति उल्लास ह. देह आ मन त बाहरी चीज ह. अध्यात्म सोच के इहाँ तक पहुंचा देला. एह साँच तक पहुँचा देला. इहाँ तक पहुंचे में पूजा-प्रार्थना, योग, ध्यान, स्वाध्याय, उपवास, व्रत आदि मदद करेला. एह सब से आत्मा के रिचार्ज करीं. दियरी-बाती आ छठ के शुभकामना के साथ. Source-https://hindi.news18.com/news/bhojpuri-news/happy-diwali-2021-chhath-puja-clean-own-heart-read-in-bhojpuri-3833572.html

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