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  • Bhojpuri के रामचंद्र शुक्ल रहले डॉ उदयनारायण तिवारी: ओइसे त उदयनारायण जी के पैतृक गांव रहे पिपरपांती,जवन उत्तर प्रदेश के बलिया जिला में आवेला,बाकिर जनम भइल रहे ओही जिला के पाण्डेयपुर गांव में दू जुलाई,1903 का दिने।पाण्डेयपुर में निनिआउर रहे,जहवां नाना के कवनो दोसर औलाद ना होखे के कारन नवरसा मिलल रहे।हालांकि शांडिल्य गोत्र के ओह ब्राह्मण परिवार में संस्कृत आ जोतिस के बोलबाला रहे,तबो उदयनारायण जी के नांव अंगरेजी स्कूल में लिखवावल गइल।ऊंच शिक्षा उहांके प्रयाग गइनीं आ सन् 1927में अंगरेजी-अर्थशास्त्र-हिन्दी विषय में बीए कइला का बाद 1929में अर्थशास्त्र में एमए के उपाधि हासिल कइनीं। अगिला साल 1930में प्रयागराज के दारागंज हाई स्कूल में तिवारी जी इतिहास के अध्यापक हो गइनीं। बाकिर तिवारी जी के दिली लालसा रहे भाषा-साहित्य के दिसाईं किछु करेके।एह से पलखत पावते उहांके कोलकाता के जातरा प निकलि गइनीं -ओह घरी के नामी भाषावैज्ञानिक डॉ सुनीति कुमार चटर्जी से मिलिके उचित सलाह लेबे के दियानत से। उहां गइला प पता चलल कि सुनीति कुमार चटर्जी साहब त ‘प्राच्य विद्या सम्मेलन’ में भाग लेबे पटना गइल बानीं। तिवारिओ जी भागल-भागल पटना पहुंचि गइनीं।चार दिन के ओह सम्मेलन में चटर्जी साहब के व्याख्यान उहां के अभिभूत कऽ देले रहे।पालि भाषा में त उहांके भासन त अतना बेजोड़ रहल कि उदयनारायण जी मने-मने चटर्जी साहब के गुरु मानि लिहनीं आ जाके उहां के गोड़ छूने लिहनीं।जब उहांके हिन्दी में पी-एच डी करेके मंशा जाहिर कइनीं, त चटर्जी साहब भोजपुरिए में बोलत कहनीं “तूं भोजपुरी खातिर समर्पित भाव से काम करऽ!तहरा ओमें नांव आ जस दूनों मिली।” तिवारी जी के त गुरुमंत्रे मिलि गइल रहे।बाकिर ओकरा पहिले ऊ अर्थशास्त्र का बाद हिन्दी आ पालि-दूनों विषय में एमए कइलन।ओकरा बाद कोलकाता विश्वविद्यालय से 1941में तुलनात्मक भाषा विज्ञान में एमए के उपाधि हासिल कइलन। एह तरी, अर्थशास्त्र,हिन्दी,पालि आउर तुलनात्मक भाषा विज्ञान -चारों विषय के परास्नातक हो गइनीं तिवारी जी। डॉ सुनीति कुमार चटर्जी से मशविरा कऽके तिवारी जी प्रयागराज में डॉ बाबूराम सक्सेना आ क्षेमेशचंद्र चट्टोपाध्याय से भेंट कइनीं आ सक्सेना जी के निर्देशन में डी लिट खातिर अधिनिबंध तय्यार करे में लवसान हो गइनीं।’ए डायलेक्ट ऑफ भोजपुरी’ शीर्षक से जब ऊ सइ पेज के निबंध ‘बिहार-उड़ीसा रिसर्च सोसायटी’ के शोधपत्र में प्रमुखता से प्रकाशित भइल,त भाषा विज्ञानी लोग दंग रहि गइल। डॉ सुनीति कुमार चटर्जी का संगहीं डॉ जाॅर्ज ग्रियर्सनो तिवारी जी के शोध निबंध के भूरि-भूरि तारीफ कइलन आ सभकर धियान भोजपुरी प कइल गइल एह ऐतिहासिक अतुलनीय शोध के काम पर गइल। एही पर उदयनारायण जी के डी लिट के उपाधि मिलल सन् 1944में आ ओही साल उहांके इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राध्यापक के रूप में नियुक्त हो गइनीं।विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अमरनाथ झा के,महापंडित राहुल सांकृत्यायन के खूब नेह-छोह मिलल।सुनीति बाबू त गुरुएजी रहनीं।फेरु त उहांके देश-दुनिया में मशहूर होत चलि गइनीं आ भाषावैज्ञानिक का रूप में अमेरिका के लिंग्विस्टिक सोसायटी, लंदन विश्वविद्यालय के डेकन काॅलेज में उहांके यादगार व्याख्यान भइल।रूस, फ्रांस, जर्मनी, इंग्लैंड वगैरह देशन में जाके उहांके शोध-अध्ययन कइनीं, व्याख्यान दिहनीं आ खूब नांव कमइनीं।पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में त उहांके छव महीना ले रहनीं आ उहां से स्वदेश लवटिके जबलपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष का रूप में सेवानिवृत्ति तक सेवारत रहनीं। ‘भोजपुरी भाषा और साहित्य’ डॉ उदयनारायण तिवारी जी के अनमोल देन बा, जवना में भोजपुरी के उद्भव,विकास आउर क्रमिक इतिहास समाहित बा।ई शोधप्रबंध उहांके नेपाल,मारीशस का संगहीं देश के सउंसे भोजपुरी इलाका के भ्रमण आ सर्वेक्षण कइला का बाद जाके तय्यार कइले रहनीं। एह से ऊ अतना प्रामाणिक साबित भइल कि ओकरे आधार-स्तंभ पर किसिम-किसिम के भोजपुरी भाषा आ साहित्य के इतिहास के महल ठाढ़ भइलन स। बाकिर एकरा खातिर प्रेरणा-पुरुष डाॅ सुनीति कुमार चटर्जी के उहांके बेरि-बेरि इयाद करत रहनीं।’भोजपुरी अकादमी पत्रिका’ में उहां के स्वीकारोक्ति ग़ौरतलब बा-“डॉ चटर्जी बड़ा सनेह से हमरा पीठि पर हाथ राखत कहलन-भाषा विज्ञान के अध्ययन खातिर तूं सबसे उपयुक्त आदमी बाड़ऽ।अच्छा होई कि तूं अपना मातृभाषा भोजपुरी पर डी लिट खातिर अधिनिबंध तय्यार करऽ!ऊ इहो आदेश दिहलन कि चार दिन जबले ऊ पटना में बाड़न, हम संगहीं रहीं।ओह चार दिन में हमरा अइसन लागल, जइसे कवनो खास लोक में पंवरत होईं।तब तक के जिनिगी में हमरा अइसन विद्याचरण सम्पन्न आ स्निग्ध व्यक्ति से मिले के सौभाग्य ना मिलल रहे।हम एकरा के अपना पूर्व जनम के पुन्न के फल मनलीं कि जवना गुरु के खोज में हम रहलीं,ऊ मिल गइल रहलन।” सादगीपूर्ण जिनिगी जिएवाला तिवारी जी में इचिकियो दिखावा ना लउकत रहे।भोजपुरी के हरेक दिसाईं बढ़न्ती के उहांके हिमायती रहनीं आ गांधीवादी ग्रामसुराज में उहांके आस्था रहे।उहांके अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के गठन भइला का बाद पहिलका अधिवेशन के अध्यक्षता कइले रहनीं आ अइसन लालित्यपूर्ण अध्यक्षीय उद्बोधन देले रहनीं कि सभे भोजपुरिया झूमि उठल रहलन।उहांके देश-दुनिया में भोजपुरी भाषा आ साहित्य के हो रहल लगातार बढ़न्ती के जिकिर कइले रहनीं आ एकरा वाजिब हक खातिर संघर्ष के धार तेज करेके गोहारो कइले रहनीं।आखिर कब जागी भोजपुरिया समाज आ कब मिली एह भाषा-साहित्य के मान-सम्मान? Source- https://hindi.news18.com/news/bhojpuri-news/uday-narayan-tiwari-was-ram-chandra-shukla-of-bhojpuri-know-all-about-him-3795376.html

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