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  • Bhojpuri: जब रामलीला वाला हनुमान जी उड़ि के पार कइ गइलन वरुणा नदी: टेकराम भट्ट रामलीला में हनुमान जी क पाठ करत रहलन, अंगरेज कलक्टर ताना मरलस त ताव में आइ गइलन। फिर का, भगवान राम क स्मरण कइ के छलांग लगाइ देहलन, अउर भगवान क कृपा कि वरुणा नदी के पार कइ गइलन। टेकराम भट्ट क इ कहानी आज भी बनारस में लोगन के जुबान पर हौ।

    इ घटना 1868 क हौ। देश में अंगरेजन क शासन रहल। चित्रकूट रामलीला समिति के तरफ से चौका घाट के मैदान में रामलीला होत रहल। ओह समय बनारस क कलक्टर मैकफर्सन रहल। हिंदू संस्कृति से बहुत जरय। एक दिना उ अचानक रामलीला मैदान पहुंचि गयल। ओह दिना हनुमान के समुद्र लांघि के लंका जाए क रामलीला मंचित होवय के रहल। मैकफर्सन कहलस कि हनुमान जी त सौ जोजन क समुद्र लांघि गयल रहलन, इ हनुमान जी वरुणा नदी ही पार कइ जायं त जानी। अगर न पार कइ पइहय त समझि ल इ रामलीला नौटंकी हौ, अउर एहके बंद कराइ देहल जाई।

    मैकफर्सन क बात पंडित टेकराम के करेजा में गोली के नाईं लगल। ओह समय वरुणा अपने उफान पर रहल। टेकराम रामलीला के राम से वरुणा नदी लांघि के ओह पार लंका जाए क अनुमति मंगलन। राम भी भगवान क सुमिरन कइ के ओन्हय अनुमति देइ देहलन। लेकिन एक चेतावनी देहलन कि नदी पार करत समय पीछे मुड़ि के मत देखिहा। पंडित टेकराम जय श्रीराम क नाव लेइ के जब छलांग लगइलन त असमाने में चिरई की नाईं उड़य लगलन। जब उ नदी पार कइ गइलन त ओन्हय भी महाआश्चर्य भयल। एही में उ राम क चेतावनी भुलाइ गइलन अउर उत्साह में पीछे मुड़ि के देखय लगलन। जइसय पीछे मुड़ि के देखलन उ जमीन पर गिरि पड़लन अउर ओनकर ओही मउत होइ गइल। इधर रामलीला के हनुमान के हवा में उड़त देखि के मैकफर्सन बेहोश होइ गयल।

    चौका घाट में वरुणा नदी के किनारे पंडित टेकराम के स्मृति में हनुमान जी क एक मंदिर बनल हौ। मंदिर में उ मुखौटा आज भी रखल हौ, जवने के पहिनि के पंडित टेकराम हनुमान जी क पाठ कइले रहलन। पंडित टेकराम बड़ी-बड़ी मोछ रखय। एह से इ मंदिर मोछ वाले हनुमान जी के नावे से परसिद्ध हौ।

    चित्रकूट क रामलीला बनारस क एक सबसे पुरानी रामलीला हौ, जवने क शुरुआत मेघा भगत कइले रहलन। रामलीला हर साल कुआर महीना के अंधियरिया पाख में नवमी के दिना मुकुट पूजा के साथ शुरू होला अउर कुआर के पूर्णिमा के दिना दशावतार के झांकी के साथ संपन्न होइ जाला। मुकुट पूजा के बाद इहां क रामलीला अयोध्या कांड से शुरू होला। दूसरे दिना राज्याभिषेक क लीला होला। अठारवें दिना नाटी इमली के मैदान में दुनिया क प्रसिद्ध भरत मिलाप क आयोजन होला। नाटी इमली क भरत मिलाप सबसे कम समय वाला विश्व क सबसे बड़ा मेला हौ। ई मेला काशी क लक्खा मेंला के रूप में जानल जाला। पांच से 10 मिनट क दृश्य देखय बदे पूरा बनारस उमड़ि पड़यला। देश-दुनिया से भी लोग नाटी इमली क भरत मिलाप देखय आवयलन। खुद काशी नरेश भरत मिलाप क दृश्य देखय बदे हाथी पर सवार होइ के नाटी इमली के मैदान पहुंचयलन। भरत मिलाप के दूसरे दिना आत्मविरेश्वर मंदिर में धनुष-बाण क झांकी क दर्शन होला। कहल जाला कि इ धनुष-बाण खुद भगवान श्रीराम बाल रूप में मेघा भगत के देहले रहलन।

    कोरोना के नाते पिछले साल खुले में रामलीला नाहीं होइ पइलस। पूरी रामलीला बड़ा गणेश महल्ला में मौजूद अयोध्या भवन में भइल रहल। एह साल भी 22 दिन क पूरी रामलीला 30 सितंबर से कोरोना प्रोटोकाल के साथ प्रतीकात्मक रूप से होत हौ।

    Source- https://hindi.news18.com/news/bhojpuri-news/banaras-tek-ram-bhatt-life-story-in-bhojpuri-3785331.html

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