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  • भोजपुरी विशेष में आज पंडित बेनीराम की कजरी-काहे मोरी सुधि बिसराये रे बिदेसिया: काहे मोरी सुधि बिसराये रे बिदेसिया

    विदेशी प्रीतम तुम मुझे क्यों भूल गये ? तड़पि-तड़पि दिन रैन गंवायो रे तड़पि-तड़पि दिन रैन गंवायो रे काहें मोसे प्रीत लगाये रे बिदेसिया

    तड़प-तड़प कर रात और दिन बीत रहे हैं, तूने मुझसे प्रीत क्यों लगाया है। अपने तो कुबरी के प्रेम भूलाने रे अपने तो कुबरी के प्रेम भूलाने रे मोह लिख जोग पठाये रे बिदेसिया

    खुद तो कुबड़ी सौतन के प्रेम में भूले हुए हो और मुझे जोग लिखकर भेजे हो। जिन सुख अधर अमि रस पाये रे जिन सुख अधर अमि रस पाये रे तिन विष पान कराये रे बिदेसिया

    जिन अधरों ने सुख का अमृतपान किया है, उन्हें तुम (बटोही) विष पान करा रहे हो। कहे 'बेनीराम' लगे प्रेम कटारी रे कहे 'बेनीराम' लगे प्रेम कटारी रे उद्धो जी को ज्ञान भुलाये रे बटोहिया

    कवि बेनी राम कहते हैं कि जब प्रेम की कटारी लग जाती है तो उद्धव जी का सारा ज्ञान भूल जाता है। Source- hhttps://www.amarujala.com/kavya/kavya-charcha/bhojpuri-song-kajri-by-pandit-beniram?page=5

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