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  • Bhojpuri में पढ़ें- मोटकी मुरइया जौनपुर क.: लोकगायक बालेश्वर क एक गो भोजपुरी गाना बा, बहुत फेमस भयल रहल -मोटकी मुरइया जवनपुर क, नीक लागे टिकुलिया गोरखपुर क। लेकिन जौनपुर क मोटकी मुरई बालेश्वर के गाना से ना जाने केतना पहिले क फेमस हौ, केहू के नाहीं पता। पुरनिया लोग बतावयलन कि 1857 में अंगरेजन से बचय बदे लोग एही मोटकी मुरई के मदद से नदी पार कइ गयल रहलन। जौनपुर के मोटकी मुरई क सीधा संबंध इहां बहय वाली गोमती नदी से जुड़यला। गोमती नदी न होत, त जौनपुर क इ मोटकी मुरई भी न होत। लेकिन जौनपुर में भी इ मुरई कुछय इलाके क फसल हौ। अपने नसल के कारण खास इ मुरई देश ही नाहीं दुनिया में आपन कद ऊंचा कइलस। लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे जौनपुरिया मुरई क कद छोट भइल जात हौ। जौनपुर उत्तर प्रदेश क एक ऐतिहासिक नगर हौ। दिल्ली क बादशाह फिरोज शाह तुगलक अपने चचेरे भाई मुहम्मद बिन तुगलक के याद में 14वीं शताब्दी में इ नगर बनवइले रहल। मुहम्मद बिन तुगलक क असली नाव जौना खां रहल, अउर ओही के नाते शहर क नाम जौनपुर रखल गयल। अजादी से पहिले क जेतना भी नगर बसल हयन, सब कवनो न कवनो नदी के किनारे हयन। जौनपुर भी गोमती नदी के तट पर बसल हौ। गोमती नदी इहां से बहय वाली मुख्य नदी हौ, अउर इहय नदी जौनपुर नगर के अलावा पूरे जौनपुर जिला क एक तरह से जीवन रेखा हौ। नदी अपने संगे उपजाऊ मट्टी लेइके आवयलिन। गोमती नदी के किनारे के कुछ गांवन क भौगोलिक स्थिति कुछ अइसन हौ कि गोमती क लियावल मट्टी उहां कुछ खास तरह क उर्वर होइ गइल, अउर इ मट्टी जौनपुरिया नेवार मुरई के खेती क केंद्र बनि गइल। मुरई क इ नेवार प्रजाति कहां से आइल, कइसे आइल, एकर कवनो जानकारी उपलब्ध नाहीं हौ। किसानन के बीचे सबसे मोट, लंबी अउर वजनी मुरई पैदा करय क कंपटीशन चलय। शासन-प्रशासन के ओरी से किसानन के सम्मानित कयल जाय। लेकिन समय के साथ अब इ कुल कहानी होइ गयल हौ। जौनपुरी नेवार क आकार बहुत घटि गयल हौ। न उ लंबाई, न मोटाई, न वजन अउर न उ सवाद। छह-सात किलो से जादा क नेवार अब मुश्किल से मिली। शासन-प्रशासन के ओरी से अब प्रोत्साहन भी नाहीं हौ। नेवार के बहुत सेवा क जरूरत होला, लागत अधिक लगयला। लेकिन बजार में दाम नाहीं मिलत, जवने के नाते किसान अब नेवार के बदले अइसन सब्जी क खेती करय लगल हयन, जवन कम समय में अधिक उपज देय। नेवार पहिले अगैती फसल के साथे बोअल जाय अउर मकर संक्रांति के होई जाय, उ अब पछैती होइ गइल हौ। प्रजाति बचावय बदे कुछ किसान नेवार बोअयलन, लेकिन ओहमें पहिले वाली बात नाहीं रहि गइल हौ। नेवार में गिरावट क एक दूसर कारण शहरीकरण हौ। शहर क मकदूमशाह अढ़न, खासनपुर, पुराना पानदरीबा अउर ताड़तला सहित शहर से सटल आधा दर्जन से अधिक गांवन क मट्टी नेवार बदे सबसे अनुकूल रहलन। लेकिन इ कुल इलाका शहरीकरण क भेट चढ़ि गइलन। अब जवन थोड़ी-बहुत जमीन बचल हौ, उहां किसान जरूरत वाली सब्जी क खेती करयलन। नेवार क आकार घटय के पीछे एक कारण प्रदूषण भी बतावल जाला। किसान सिंचाई बदे गोमती नदी क पानी इस्तेमाल करयलन। आज के तारीख में गोमती क पानी प्रदूषित होइ गयल हौ। प्रदूषित पानी से सिंचाई कइले के नाते नेवार क ओतना विकास नाहीं होइ पावत, जेतना पहिले साफ पानी से होत रहल। नेवार क अच्छी फसल पैदा करय बदे किसान पहिले खेते में तंबाकू क फसल बोअय। लेकिन तंबाकू के खेती बदे लाइसेंस अनिवार्य होइ गयल। इ कारण भी नेवार के रस्ते क एक बड़ा रोड़ा बनल। कुल मिलाइ के जौनपुरी नेवार क अस्तित्व खतरे में हौ। प्रशासन के चाही कि जौनपुर क शान नेवार के बचावय बदे मजबूत पहल करय, नाहीं त नेवार अब किस्सा-कहानी में ही रहि जाई। Source- https://hindi.news18.com/news/bhojpuri-news/gorakhpur-historical-background-and-interesting-facts-read-in-bhojpuri-3742952.html

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